गया जी हिंदू धर्म में पितरों के श्राद्ध एवं पिंडदान के लिए सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार गया में पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष गया जी आकर अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म करते हैं।गया में पिंडदान मुख्य रूप से विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, अक्षयवट, प्रेतशिला और रामशिला जैसे पवित्र स्थलों पर किया जाता है। प्रत्येक स्थान का अपना विशेष धार्मिक महत्व है।पिंडदान के लिए आवश्यक सामग्री:• कुश• तिल• जौ• पिंड सामग्री• पुष्प• जलयदि गोत्र ज्ञात हो तो बताना चाहिए, अन्यथा संकल्प के माध्यम से भी विधि संपन्न की जा सकती है।पिंडदान की प्रक्रिया:1. संकल्प2. तर्पण3. पिंड अर्पण4. ब्राह्मण पूजन5. पितृ प्रार्थनागया में एक दिन, तीन दिन एवं विशेष श्राद्ध विधियां भी उपलब्ध हैं। श्रद्धालु अपनी आवश्यकता एवं परंपरा के अनुसार विधि का चयन कर सकते हैं।पंडित करण जी द्वारा पिंडदान, श्राद्ध कर्म, तर्पण एवं अन्य पितृ कार्य विधिवत संपन्न कराए जाते हैं।संपर्क करें:पंडित करण जीमोबाइल: 9162887530गया जी, बिहारWhatsApp द्वारा संपर्क कर सकते हैं। पूर्व सूचना देने पर रहने एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

गया में पिंडदान कहाँ किया जाता है?
गया में पिंडदान मुख्य रूप से विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, अक्षयवट, में किया जाता है।
पिंडदान की प्रक्रिया
संकल्प, तर्पण, पिंड अर्पण, ब्राह्मण पूजन एवं पितृ प्रार्थना के माध्यम से पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
संपर्क करें
पंडित करण जीमोबाइल: 9162887530, 9065839167 गया जी,
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